धामी कैबिनेट के बड़े फैसले: बसों की खरीद से लेकर कुंभ और मदरसों तक, कई अहम निर्णयों पर लगी मुहर…
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्यहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद लिए गए फैसलों ने प्रशासनिक व्यवस्था, परिवहन, कुंभ मेला प्रबंधन और अल्पसंख्यक शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में बदलाव का रास्ता साफ कर दिया है।
कैबिनेट ने परिवहन विभाग को मजबूत करने के लिए 250 नई बसों की खरीद को मंजूरी दी है, जिससे आम जनता को बेहतर और सुगम परिवहन सुविधा मिल सकेगी। साथ ही विभाग में परिवर्तन पर्यवेक्षक और सिपाहियों के लिए वर्दी भी निर्धारित कर दी गई है।
कुंभ मेले के आयोजन को और प्रभावी बनाने के लिए वित्तीय अधिकारों में भी बदलाव किया गया है। अब मेला अधिकारी 1 करोड़ रुपये तक के कार्यों को स्वीकृति दे सकेंगे, जबकि 5 करोड़ रुपये तक के कार्यों को गढ़वाल आयुक्त मंजूरी दे पाएंगे। इससे विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भी अहम फैसला लिया गया है। उद्योग विभाग में दर को 7 रुपये प्रति कुंटल से बढ़ाकर 8 रुपये प्रति कुंटल कर दिया गया है। वहीं वित्त विभाग में आबकारी नीति के तहत 6% व्यवस्था को अब राज्यकर विभाग द्वारा अपनाया जाएगा।
वन विभाग में भर्ती से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए वन दरोगा की आयु सीमा 21 से बढ़ाकर 35 वर्ष कर दी गई है, जबकि वन आरक्षी के लिए आयु सीमा 18 से 25 वर्ष निर्धारित की गई है। इससे अधिक युवाओं को अवसर मिलने की संभावना है।
ठेकेदारी व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब D श्रेणी के सूचीबद्ध ठेकेदार 1 करोड़ की बजाय 1.50 करोड़ रुपये तक के कार्य कर सकेंगे, जिससे छोटे ठेकेदारों को भी बड़े प्रोजेक्ट्स में मौका मिलेगा।
अल्पसंख्यक शिक्षा को लेकर भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक अधिनियम 2025 को अधिसूचित कर दिया गया है, जिसके तहत अब मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, प्रतीक्षा सूची की वैधता को लेकर भी स्पष्टता लाई गई है। अब प्रतीक्षा सूची एक वर्ष तक ही मान्य होगी और यदि इस अवधि के भीतर अभ्यर्थी को अवसर मिल जाता है, तो उसे वैध माना जाएगा।
कुल मिलाकर, धामी कैबिनेट के ये फैसले राज्य में प्रशासनिक सुधार, विकास कार्यों की गति और रोजगार के अवसरों को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं।
