GST काउंसिल के बड़े फैसले: कारोबारियों को राहत, GST में कई नियम होंगे आसान; गिरफ्तारी की शक्ति हटाने और प्रॉसिक्यूशन की सीमा ₹5 करोड़ करने की सिफारिश…

नई दिल्ली। 57वीं GST काउंसिल की बैठक में करदाताओं और कारोबारियों से जुड़े कई अहम सुधारों पर सिफारिशें की गई हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक में GST में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, ITC और आपराधिक कार्रवाई से जुड़े नियमों को सरल बनाने पर जोर दिया गया। सरकार के मुताबिक इन बदलावों का उद्देश्य कारोबार में अनुपालन का बोझ कम करना और टैक्स व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है।
GST काउंसिल ने रिफंड प्रक्रिया को सिस्टम आधारित और अधिक स्वचालित बनाने की सिफारिश की है। रिफंड आवेदन पर acknowledgment या deficiency memo जारी करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव है। वहीं जीरो-रेटेड सप्लाई और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से जुड़े पात्र मामलों में 90 प्रतिशत रिफंड राशि का provisional sanction सिस्टम द्वारा जोखिम मूल्यांकन के आधार पर स्वतः किया जा सकेगा।
बैठक में CGST Act की धारा 69 को हटाकर GST के तहत गिरफ्तारी की शक्ति वापस लेने की सिफारिश की गई है। साथ ही आपराधिक कार्रवाई की मौद्रिक सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का प्रस्ताव है। हालांकि यह बदलाव लागू होने के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी होगा।
काउंसिल ने Input Tax Credit से जुड़े नियमों में भी सुधार की सिफारिश की है। कुछ प्रतिबंधित ITC श्रेणियों में बदलाव का प्रस्ताव है, जिसमें आउटडोर कैटरिंग, हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस जैसी कुछ सेवाओं से संबंधित ITC प्रतिबंधों में राहत शामिल है। इसका उद्देश्य टैक्स के cascading effect को कम करना और ITC का प्रवाह आसान बनाना है।
छोटे कारोबारियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए दूसरे राज्यों में सामान बेचने वालों के लिए सरल GST registration mechanism की सिफारिश की गई है। कुछ निर्धारित शर्तों के तहत ऐसे छोटे sellers को संबंधित राज्य में अलग से भौतिक कारोबार स्थल स्थापित किए बिना सिस्टम के माध्यम से automatic registration मिल सकेगा।
GST काउंसिल ने ₹5 करोड़ तक के टर्नओवर वाले और केवल B2C सप्लाई करने वाले कारोबारियों के लिए Annual Return Quarterly Payment (ARQP) नामक वैकल्पिक व्यवस्था की अवधारणा को सैद्धांतिक मंजूरी भी दी है। इसके अलावा ₹5 करोड़ तक के कारोबारियों के लिए कुछ परिस्थितियों में देर से रिटर्न दाखिल करने पर late fee राहत की भी सिफारिश की गई है।
ध्यान देने वाली बात: वायरल हो रही जानकारी में “रिफंड 17 दिन में निश्चित रूप से मिलेगा” और “सप्लायर टैक्स जमा न करे तो खरीदार का ITC नहीं रुकेगा” जैसे दावे जिस तरह लिखे जा रहे हैं, वे PIB की आधिकारिक 57वीं GST Council recommendations में इसी रूप में नहीं दिए गए हैं। आधिकारिक दस्तावेज में 10 दिन की acknowledgment/deficiency समयसीमा और 90% provisional refund जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख है।
57वीं GST काउंसिल बैठक का फोकस टैक्स दरों के बजाय GST प्रक्रिया को सरल बनाने, रिफंड तेज करने, ITC व्यवस्था सुधारने, रजिस्ट्रेशन आसान करने और कर विवादों का बोझ घटाने पर रहा।

