धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा को लेकर मंडलायुक्त दीपक रावत सख्त, कुमाऊं मंडल के सभी जिलों को दिए अहम निर्देश…

FB_IMG_1768963725833
खबर शेयर करें -

नैनीताल। धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और यात्राओं को सरल, सुखद व सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से मंडलायुक्त दीपक रावत ने कुमाऊं मंडल के सभी जिलाधिकारियों एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की।

 

 

 

मंडलायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कैंची धाम, मां गर्जिया देवी, जागेश्वर धाम, मां पूर्णागिरी, हाट कालिका, बागनाथ सहित सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर क्षमता के अनुसार श्रद्धालुओं का प्रवेश सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या भगदड़ जैसी घटनाओं से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

यह भी पढ़ें:  मिलावटखोरों पर खाद्य सुरक्षा विभाग का शिकंजा, हल्द्वानी-लालकुआं में ताबड़तोड़ निरीक्षण, 10 खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच, घी, किशमिश और बेसन के नमूने जांच को भेजे; मिसब्रांडिंग पर चालानी कार्रवाई की तैयारी...

 

 

 

उन्होंने निर्देशित किया कि भीड़ प्रबंधन के लिए चरणबद्ध प्रवेश प्रणाली, पर्याप्त पुलिस बल, स्वयंसेवक, मजबूत बैरिकेडिंग और महत्वपूर्ण पर्वों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने, हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे लगाने और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

 

 

 

मंडलायुक्त ने कहा कि शॉर्ट टर्म व्यवस्थाओं जैसे पार्किंग प्रबंधन, पैदल मार्गों की सुगमता, दिशा सूचक बोर्ड, प्राथमिक चिकित्सा, पेयजल, शौचालय एवं प्रतीक्षालय की सुविधाएं तय समयसीमा में पूर्ण की जाएं। वहीं, लॉन्ग टर्म परियोजनाओं के तहत यातायात सुधार, पार्किंग विस्तार, सड़क चौड़ीकरण, आपदा सुरक्षा उपकरण, तकनीकी एकीकरण एवं इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम जैसे प्रस्ताव 15 दिन के भीतर शासन को भेजने के निर्देश दिए।

यह भी पढ़ें:  नेपाल से आए अधिकारियों ने देखा पिथौरागढ़ का गौरव, सौर किले की विरासत ने जीता दिल, भारत-नेपाल समन्वय बैठक के बीच ऐतिहासिक सौर किले का भ्रमण, नेपाली अधिकारियों ने की सांस्कृतिक विरासत की सराहना...

 

 

 

उन्होंने आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर देते हुए कहा कि एआई आधारित हेड काउंट सिस्टम, भीड़ घनत्व निगरानी उपकरण, आईओटी आधारित सेंसर और डिजिटल सर्विलांस सिस्टम को धार्मिक स्थलों पर लागू किया जाए। साथ ही आपदा प्रबंधन की दृष्टि से एसडीआरएफ, अग्निशमन सेवा और स्थानीय पुलिस के साथ बेहतर समन्वय, आपातकालीन निकासी मार्ग, विद्युत एवं अग्नि सुरक्षा ऑडिट को भी अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।

 

 

 

इस दौरान पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं रिद्धिम अग्रवाल ने निर्देश दिए कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने हेतु क्रेन, जेसीबी और अन्य यांत्रिक संसाधनों की मांग पूर्व में ही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कैंची धाम में अधिक भीड़ के मद्देनज़र हल्द्वानी से शटल सेवा प्रारंभ करने तथा उसके लिए उपयुक्त पार्किंग स्थलों के चयन के निर्देश भी दिए।

यह भी पढ़ें:  बिग ब्रेकिंग–गड्ढों में तब्दील लालकुआं–बिंदुखत्ता का मुख्य मार्ग, हादसे को दे रहा निमंत्रण, जल भराव और कीचड़ से राहगीर परेशान, कुमाऊं आयुक्त से तत्काल मरम्मत और स्थायी समाधान की मांग...

 

 

 

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टीसी ने कैंची धाम और गर्जिया देवी मंदिर, डीएम चंपावत मनीष कुमार ने मां पूर्णागिरी मंदिर तथा डीएम अल्मोड़ा अंशुल सिंह ने जागेश्वर धाम से संबंधित तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी।

 

 

 

बैठक में जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर नितिन भदौरिया, पिथौरागढ़ आशीष भटगाई, बागेश्वर आकांक्षा कोंडे सहित सभी जनपदों के एसपी, एसएसपी एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

 

 

 

बैठक का उद्देश्य स्पष्ट रहा—श्रद्धालुओं की आस्था के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और धार्मिक यात्राओं को सुव्यवस्थित, सुरक्षित व सुखद बनाना।

 

 

 

Ad