नोएडा में गूंजा उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति का रंग, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हुए 15वें महाकौथिग में शामिल…

0
FB_IMG_1766238623485
खबर शेयर करें -

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नोएडा (उत्तर प्रदेश)। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक बार फिर पूरे वैभव के साथ देखने को मिली, जब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गौतमबुद्धनगर, नोएडा में पर्वतीय सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित 15वें उत्तराखण्ड महाकौथिग में प्रतिभाग किया। इस भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डी, लोक कलाकार, युवा एवं महिलाएं उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और आयोजन की खुले दिल से सराहना की।

 

 

 

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहते हुए भी उत्तराखण्डी समाज द्वारा अपनी सांस्कृतिक पहचान, लोक परंपराओं और मूल्यों को जीवंत बनाए रखना अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने प्रवासी उत्तराखण्डियों को राज्य की संस्कृति का सच्चा ब्रांड एम्बेसडर बताते हुए कहा कि वे राज्य से दूर रहकर भी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़े हुए हैं।

यह भी पढ़ें:  उत्तराखंड–जनहित सर्वोपरि: कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत सख्त, विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता पर दिया जोर...

 

 

 

उन्होंने कहा कि विगत 15 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा उत्तराखण्ड महाकौथिग आज लोक कला, लोक संगीत, पारंपरिक विरासत और पहाड़ी उत्पादों को पहचान दिलाने का एक सशक्त मंच बन चुका है। ऐसे आयोजन न केवल उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन में अहम भूमिका निभाते हैं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में बसे उत्तराखण्डी समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य भी करते हैं।

 

 

 

मुख्यमंत्री ने बताया कि महाकौथिग में पारंपरिक वेशभूषा, हस्तशिल्प, कारीगरी, जैविक उत्पादों और पहाड़ी व्यंजनों के साथ-साथ जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़, छोपाटी जैसे लोकगीतों और छोलिया, पांडव, झोड़ा-छपेली जैसे लोक नृत्यों के माध्यम से उत्तराखण्ड की जीवंत लोकसंस्कृति के विविध रंग देखने को मिलते हैं। उन्होंने आयोजन की बढ़ती लोकप्रियता को इसकी अवधि पांच से बढ़ाकर सात दिन किए जाने का प्रमाण बताया।

यह भी पढ़ें:  उत्तराखंड–जनहित सर्वोपरि: कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत सख्त, विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता पर दिया जोर...

 

 

 

मुख्यमंत्री श्री धामी ने पर्वतीय सांस्कृतिक संस्था की पूरी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में उत्तराखण्ड की संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का सराहनीय कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक ओर देश की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया जा रहा है, वहीं ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाया जा रहा है।

 

 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। केदारखंड और मानसखंड मंदिर क्षेत्रों का सौंदर्यीकरण, हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ का पुनरुद्धार, हरिद्वार-ऋषिकेश और शारदा कॉरिडोर, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड, ऑल वेदर रोड, भारतमाला, पर्वतमाला और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना जैसी योजनाओं से राज्य के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिल रही है।

यह भी पढ़ें:  उत्तराखंड–जनहित सर्वोपरि: कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत सख्त, विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता पर दिया जोर...

 

 

 

उन्होंने बताया कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘एक जनपद, दो उत्पाद’, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’, स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, नई पर्यटन एवं फिल्म नीति, होम-स्टे, वेड इन उत्तराखण्ड और सौर स्वरोजगार योजना जैसी प्रभावी पहल की जा रही हैं। इन प्रयासों के चलते उत्तराखण्ड ने सतत विकास लक्ष्यों में देश में प्रथम स्थान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में एचीवर्स और स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी हासिल की है।

 

 

 

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य सरकार समग्र विकास के साथ-साथ उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान और डेमोग्राफी की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “उत्तराखण्ड नफरत नहीं, संस्कार चाहता है; विभाजन नहीं, एकता चाहता है। हमारा संकल्प देवभूमि उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना है।”

 

 

 

 

Ad Ad Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *