भूकंपीय सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम: उत्तराखण्ड में बिल्डिंग बायलाॅज होंगे संशोधित, विशेषज्ञ समिति गठित…

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देहरादून। उत्तराखण्ड की बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने भवन निर्माण नियमों को अधिक वैज्ञानिक, सुरक्षित और आपदा-रोधी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। भारतीय मानक भारतीय मानक ब्यूरो के नवीनतम प्रावधानों के अनुरूप अब राज्य के बिल्डिंग बायलाॅज में व्यापक संशोधन किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने वर्तमान नियमों की समीक्षा और संशोधन हेतु 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता सीएसआईआर-सीबीआरआई रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार करेंगे, जबकि यूएलएमएमसी देहरादून के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार को संयोजक बनाया गया है।

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वर्तमान में राज्य के भवन निर्माण नियम भारतीय मानकों के पुराने संस्करण पर आधारित हैं, जबकि हाल ही में पूरे उत्तराखण्ड को उच्च भूकंपीय जोन में शामिल किए जाने के बाद सख्त और आधुनिक मानकों की आवश्यकता महसूस की गई है। इसी के मद्देनज़र विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और अभियंताओं की टीम को बायलाॅज के समग्र पुनरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

समिति में आईआईटी रुड़की, ब्रिडकुल, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, विकास प्राधिकरणों, भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञों तथा अन्य तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। समिति वास्तुविदों और संरचनात्मक इंजीनियरों से भी विस्तृत विचार-विमर्श करेगी।

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मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और भूकंप के जोखिम को देखते हुए भवन निर्माण नियमों में बदलाव समय की आवश्यकता है। संशोधित बायलाॅज शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा देंगे तथा आपदा जोखिम में उल्लेखनीय कमी लाएंगे।

 

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सरकार का उद्देश्य केवल नियमों में संशोधन करना नहीं, बल्कि सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करना है। नए प्रावधानों में भूकंप-रोधी डिजाइन, भू-तकनीकी जांच, विंड लोड, संरचनात्मक सुरक्षा और आधुनिक निर्माण तकनीकों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही पारंपरिक पहाड़ी निर्माण प्रणालियों को वैज्ञानिक रूप से समाहित कर जलवायु-अनुकूल और सतत विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

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समिति संशोधित मसौदा तैयार कर उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा आवास विभाग को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक संशोधन और कार्यान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

 

नए बिल्डिंग बायलाॅज लागू होने से भवनों की संरचनात्मक मजबूती बढ़ेगी, आपदाओं के दौरान जन-धन की हानि में कमी आएगी और राज्य में सुरक्षित, टिकाऊ एवं नियोजित शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी। यह पहल उत्तराखण्ड को आपदा-सक्षम और भविष्य के लिए तैयार राज्य बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

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