बिंदुखत्ता की बुलंद आवाज दिल्ली तक गूंजी, केंद्र ने माना साक्ष्यों का दम, 84 पन्नों के 13 साक्ष्यों पर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय का संज्ञान, FRA के तहत कार्रवाई के निर्देश; राजस्व ग्राम की उम्मीदों को मिली नई ताकत…

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लालकुआं/बिंदुखत्ता। अपने अधिकार, पहचान और स्थायी भविष्य के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे बिंदुखत्ता के लोगों की आवाज अब केंद्र सरकार तक पहुंच गई है। बिंदुखत्ता वन अधिकार समिति द्वारा मजबूती से तैयार किए गए 84 पृष्ठों के 13 तथ्यात्मक एवं कानूनी साक्ष्यों का केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार के संबंधित सचिव को वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों और समिति द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

 

केंद्रीय मंत्रालय के इस कदम को बिंदुखत्ता के संघर्ष की दिशा में बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। निर्देशों की प्रति आवश्यक कार्रवाई के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार को भी भेजी गई है। इससे बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर चल रही मुहिम को नई मजबूती मिली है।

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बिंदुखत्ता की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि यहां के लोगों ने अपने अधिकारों की आवाज केवल आंदोलन और मांग तक सीमित नहीं रखी, बल्कि उसे ठोस दस्तावेजों और कानूनी साक्ष्यों के साथ मजबूती से सरकार के सामने रखा।

 

वन अधिकार समिति के अनुसार, 29 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री उत्तराखंड और केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के समक्ष 84 पृष्ठों में 13 महत्वपूर्ण तथ्यात्मक एवं कानूनी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे। इन साक्ष्यों में वन अधिकार अधिनियम के प्रावधान, जनजातीय कार्य मंत्रालय के पूर्व स्पष्टीकरण, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश, आरटीआई से प्राप्त सरकारी अभिलेख और देश के विभिन्न राज्यों में वन अधिकार अधिनियम के तहत राजस्व ग्राम घोषित किए गए गांवों के उदाहरण शामिल थे।

 

समिति का कहना है कि केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा मामले का संज्ञान लेकर उत्तराखंड सरकार को FRA के प्रावधानों के तहत कार्रवाई के निर्देश देना बेहद महत्वपूर्ण है। समिति के अनुसार, इससे यह उम्मीद मजबूत हुई है कि बिंदुखत्ता के मामले में वन भूमि अनारक्षण यानी De-reservation की प्रक्रिया के बजाय वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई का रास्ता अपनाया जाएगा।

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बिंदुखत्ता केवल एक क्षेत्र नहीं, बल्कि वर्षों से मेहनत, संघर्ष और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोगों की पहचान है। यहां की जनता ने कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी जमीन, घर और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लगातार संघर्ष किया है।

 

राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने की मांग बिंदुखत्ता के हजारों लोगों के लिए केवल प्रशासनिक पहचान का विषय नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन, विकास, बुनियादी सुविधाओं और भविष्य की स्थिरता से जुड़ा सवाल है। यही वजह है कि इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों में लंबे समय से गहरी भावनाएं जुड़ी हुई हैं।

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केंद्रीय मंत्रालय के निर्देश के बाद अब सबकी निगाहें उत्तराखंड सरकार पर टिक गई हैं। वन अधिकार समिति ने सरकार से अपेक्षा की है कि प्रस्तुत किए गए सभी 13 साक्ष्यों और दस्तावेजों का गंभीरता से परीक्षण कर कानून के अनुरूप शीघ्र निर्णय लिया जाए और बिंदुखत्ता को वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत राजस्व ग्राम घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

 

केंद्रीय स्तर पर मिले इस संज्ञान ने बिंदुखत्ता की वर्षों पुरानी उम्मीदों को नई ऊर्जा दी है। 84 पन्नों में दर्ज 13 साक्ष्यों के जरिए बिंदुखत्ता ने अपनी बात जिस मजबूती से रखी है, उसने इस पूरे मामले को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर ला खड़ा किया है।

 

अब बिंदुखत्ता के लोगों की नजर उस फैसले पर है, जो उनके वर्षों के संघर्ष, उम्मीद और भविष्य की दिशा तय करेगा।

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