बिग ब्रेकिंग–नाबालिगों के हाथ में दिया वाहन तो स्कूल प्रशासन पर होगी कार्रवाई, बाल आयोग ने कसा शिकंजा..
देहरादून। उत्तराखंड में नाबालिग स्कूली छात्रों के दोपहिया और चौपहिया वाहन चलाने के मामलों को लेकर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने स्पष्ट किया है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनता, इसके बावजूद उन्हें वाहन चलाने की अनुमति देना गंभीर लापरवाही है।
आयोग ने स्कूलों में नाबालिग छात्रों के वाहन पार्क करने की व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई है। आयोग का कहना है कि स्कूल प्रबंधन को अपने परिसर में नाबालिग छात्रों को वाहन पार्क करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
बाल आयोग अध्यक्ष ने पुणे के पोर्श हादसे का हवाला देते हुए अभिभावकों की जिम्मेदारी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नाबालिगों को वाहन सौंपने से न केवल उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ती है, बल्कि सड़क पर अन्य लोगों के लिए भी जोखिम पैदा होता है।
इस समस्या पर रोक लगाने के लिए आयोग ने एआरटीओ अधिकारियों के साथ बैठक कर सख्त नियम तैयार किए हैं। अब यदि कोई नाबालिग छात्र स्कूल यूनिफॉर्म में वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है तो संबंधित स्कूल के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने स्कूल प्रबंधन को नियमों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं।
बाल आयोग के इस रुख के बाद स्कूलों और अभिभावकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। आयोग का उद्देश्य नाबालिग छात्रों को वाहन चलाने से रोककर सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना और बच्चों के अधिकारों व सुरक्षा की रक्षा करना है।