कैबिनेट के बड़े फैसले–ड्रग फ्री उत्तराखंड अभियान को नई ताकत, 589 दैनिक श्रमिकों को मिलेगा ₹18 हजार न्यूनतम वेतन…
देहरादून। उत्तराखंड राज्य मंत्रिमंडल ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कानून-व्यवस्था, श्रमिक कल्याण, स्वास्थ्य सेवाओं और सूक्ष्म उद्योगों को मजबूती देने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। कैबिनेट के इन फैसलों से प्रदेश में ड्रग फ्री मुहिम को नई गति मिलेगी, वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को आर्थिक राहत मिलेगी और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को मिलेगा स्थायी ढांचा, राज्य में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को और सशक्त बनाने के लिए कैबिनेट ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के लिए अलग से ढांचा खड़ा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वर्ष 2022 में गठित इस टास्क फोर्स में अब तक पुलिस बल से प्रतिनियुक्ति पर कार्मिक लिए जा रहे थे, लेकिन अब राज्य मुख्यालय में पहली बार 22 स्थायी पद सृजित किए जाएंगे।
इन पदों में एक पुलिस उपाधीक्षक, दो ड्रग निरीक्षक, एक निरीक्षक, दो उपनिरीक्षक, चार मुख्य आरक्षी, आठ आरक्षी और दो आरक्षी चालक शामिल हैं। इससे ड्रग तस्करी और अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में सरकार को मजबूती मिलेगी।
वन विभाग के 589 दैनिक श्रमिकों को राहत, राज्य मंत्रिमंडल ने वन विभाग और वन विकास निगम में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए 589 श्रमिकों को न्यूनतम ₹18,000 मासिक वेतन देने का निर्णय लिया है। मंत्रिमंडलीय उप-समिति की संस्तुति के आधार पर यह फैसला लिया गया है।
वन विभाग में कुल 893 दैनिक श्रमिक कार्यरत हैं, जिनमें से 304 को पहले से ही न्यूनतम वेतनमान का लाभ मिल रहा है। अब शेष श्रमिकों को भी इसका लाभ मिलेगा, जिससे उनके आर्थिक और सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।
ईएसआई चिकित्सा सेवा का होगा विस्तार, कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई) के अंतर्गत चिकित्सा सेवा संवर्ग के पुनर्गठन के लिए “उत्तराखण्ड कर्मचारी राज्य बीमा योजना, श्रम चिकित्सा सेवा नियमावली, 2026” को प्रख्यापित किया गया है। इसके तहत कुल 94 पद सृजित किए जाएंगे।
इनमें 76 चिकित्सा अधिकारी, 11 सहायक निदेशक, छह संयुक्त निदेशक और एक अपर निदेशक का पद शामिल है। पहले ईएसआई के ढांचे में केवल एक सीएमओ और 13 चिकित्सा अधिकारी थे। नए ढांचे से प्रदेश में श्रमिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना की अवधि बढ़ी, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि को भारत सरकार द्वारा 31 मार्च 2026 तक बढ़ाए जाने के बाद राज्य मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की अवधि भी वित्तीय वर्ष 2025-26 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।
साथ ही यह भी तय किया गया है कि यदि भविष्य में केंद्र सरकार इस योजना की अवधि और आगे बढ़ाती है, तो राज्य में भी इसे स्वतः विस्तारित माना जाएगा। इससे सूक्ष्म खाद्य उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय उद्यमियों को लाभ पहुंचेगा।
कारागार अधिनियम में संशोधन का निर्णय, कैबिनेट ने “उत्तराखण्ड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) अधिनियम, 2026” के प्रारूपण को मंजूरी दी है। यह संशोधन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है, जिसमें “आदतन अपराधी (Habitual Offenders)” की परिभाषा को राज्य विधानमंडल द्वारा अधिनियमित कानूनों के अनुरूप निर्धारित करने को कहा गया है। संशोधन विधेयक को आगामी विधानसभा सत्र में पुनः प्रस्तुत किया जाएगा।
बोनस संशोधन विधेयक 2020 वापस लेने का फैसला, कोविड-19 महामारी के दौरान उद्योगों को राहत देने के उद्देश्य से लाए गए बोनस संदाय (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2020 को राज्य सरकार ने वापस लेने का निर्णय लिया है। भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा असहमति जताए जाने और वर्तमान में महामारी जैसी परिस्थितियां न होने के कारण यह कदम उठाया गया है।
राज्य मंत्रिमंडल के इन फैसलों से जहां एक ओर नशे के खिलाफ अभियान को नई धार मिलेगी, वहीं श्रमिकों और सूक्ष्म उद्यमियों को भी सीधा लाभ मिलेगा। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कानून व्यवस्था, श्रमिक कल्याण और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में ठोस कदम जारी रहेंगे।
