उत्तराखंड में खनन नियमों में बड़ा बदलाव: सीमित मशीनों से खनन को मंजूरी, भारी मशीनों पर रोक बरकरार…

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने खनन कार्यों को लेकर नियमों में अहम बदलाव करते हुए सीमित स्तर पर मशीनों के उपयोग की अनुमति दे दी है। जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और लागू नियमावली के तहत अब खनन लॉटों एवं अनुज्ञाओं में निर्धारित शर्तों के साथ मशीनों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि नदी के सक्रिय जल प्रवाह वाले क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की मशीन से खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

 

 

नई व्यवस्था के तहत खनन पट्टा धारक अब नदी के जल प्रवाह क्षेत्र को छोड़कर Tractor Mounted Front Loader with Backhoe (80 हॉर्स पावर तक) का उपयोग कर सकेंगे। वहीं सेक्शन मशीन, लिफ्टर, पोकलैंड और जेसीबी जैसी भारी मशीनों के इस्तेमाल पर पहले की तरह पूर्ण प्रतिबंध जारी रहेगा।

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सरकार के आदेश के अनुसार मशीनों के संचालन की अनुमति संबंधित जनपद के जिला खान अधिकारी द्वारा आवश्यकता और खनन क्षेत्रफल के आधार पर दी जाएगी। साथ ही एक खनन सत्र में सीमित संख्या में ही मशीनों के उपयोग की मंजूरी होगी।

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इसके अलावा सरकार ने सभी स्वीकृत मशीनों का भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। विभाग ने प्रत्येक Tractor Mounted Front Loader with Backhoe के लिए एक खनन सत्र हेतु 25 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया है।

 

 

सरकार का कहना है कि नियमों में यह बदलाव खनन कार्यों को व्यवस्थित करने, मानव श्रम और मशीनों के बीच संतुलन बनाए रखने तथा अवैध खनन पर नियंत्रण के उद्देश्य से किया गया है। वहीं पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील नदी क्षेत्रों में भारी मशीनों पर प्रतिबंध जारी रखते हुए नदी पारिस्थितिकी संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

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खनन कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि नई व्यवस्था से कार्यों में तेजी आएगी और संचालन अधिक व्यवस्थित होगा। दूसरी ओर पर्यावरणविदों ने सरकार से निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की मांग की है, ताकि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

 

 

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