बिग ब्रेकिंग–हिमालय की रक्षा ही राष्ट्र की रक्षा: डॉ. नित्यानंद की जन्मशताब्दी पर बोले–मुख्यमंत्री धामी”…

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देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को दून विश्वविद्यालय, देहरादून में डॉ. नित्यानंद की जन्मशताब्दी वर्ष समारोह के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हिमालयी पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए श्री जयेंद्र सिंह राणा एवं श्री संजय सत्यवली को हिमालयी पर्यावरण पुरस्कार 2025-26 से सम्मानित किया।

 

 

 

मुख्यमंत्री ने डॉ. नित्यानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन हिमालय, प्रकृति, समाज और राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया। उनकी सोच हिमालय की शिखरों जैसी ऊँची और उनका सेवा-भाव हिमालय की घाटियों से भी अधिक गहरा था। डॉ. नित्यानंद का स्पष्ट मानना था कि हिमालय की रक्षा करना भारतीय सभ्यता और राष्ट्र के भविष्य की रक्षा के समान है।

 

 

 

श्री धामी ने कहा कि डॉ. नित्यानंद ने विज्ञान को अध्यात्म से, शोध को लोक-जीवन से और चिंतन को राष्ट्रहित से जोड़ने का अद्वितीय कार्य किया। वे समाज के प्रत्येक वर्ग में राष्ट्रभाव और सामाजिक चेतना का संचार करते रहे तथा ग्राम सशक्तिकरण के लिए आजीवन समर्पित रहे। उन्होंने प्रतिवर्ष अपनी आय से लगभग 40 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान कर शिक्षा को प्रोत्साहित किया।

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मुख्यमंत्री ने स्मरण किया कि 1991 की उत्तरकाशी और 1999 की चमोली आपदा के बाद डॉ. नित्यानंद ने स्वयंसेवकों के साथ मिलकर राहत एवं पुनर्वास का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया, जो आज भी अनुकरणीय है। उन्होंने मनेरी गाँव को केंद्र बनाकर 400 से अधिक भूकंपरोधी मकानों का निर्माण कराया और आसपास के 50 से अधिक गाँवों को मॉडल गाँवों के रूप में विकसित किया।

 

 

 

उन्होंने बताया कि डॉ. नित्यानंद द्वारा गठित उत्तरांचल दैवीय आपदा पीड़ित सहायता समिति ने सेवा को संस्थागत स्वरूप दिया, जो आज भी देशभर में आपदाओं के समय मानवता की सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। देहरादून में संचालित डॉ. नित्यानंद हिमालय शोध एवं अध्ययन केंद्र उनके विचारों को आगे बढ़ाते हुए हिमालयी अध्ययन, सतत विकास, आपदा प्रबंधन और नीति-निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हिमालय संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, जल स्रोत संरक्षण अभियान जैसे माध्यमों से हिमालय के दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य में सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है तथा डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम के माध्यम से अब तक हिमालयी क्षेत्र में 72 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई गई है।

 

 

 

उन्होंने बताया कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए पौधरोपण, जल संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने हेतु सौर ऊर्जा सहित अन्य हरित ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, नौलों, धारों एवं वर्षा आधारित नदियों जैसे पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए स्प्रिंग एंड रिवर रीजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA) का गठन किया गया है।

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मुख्यमंत्री ने आमजन से आह्वान किया कि वे जीवन के प्रत्येक महत्वपूर्ण अवसर—जैसे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या अन्य स्मरणीय दिनों—पर एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी नियमित देखभाल करें, ताकि देवभूमि उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाया जा सके।

 

 

 

कार्यक्रम में आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. दिनेश, प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र, विधायक श्री विनोद चमोली, श्री मुन्ना सिंह चौहान, श्री बृजभूषण गैरोला, डॉ. कमलेश कुमार, उत्तरांचल उत्थान परिषद के संरक्षक श्री प्रेम बड़ाकोटी, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

 

 

 

 

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