बिग ब्रेकिंग– देवभूमि के ‘देवत्व’ को संवारने की दिशा में बड़ा कदम, बजट 2026–27 में तीर्थाटन और आध्यात्मिक पर्यटन पर फोकस…

0
FB_IMG_1772628441234
खबर शेयर करें -

 

 

 

 

देहरादून। देवभूमि उत्तराखण्ड की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान को और सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2026–27 के बजट में तीर्थाटन, धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर धनराशि का प्रावधान किया गया है।

 

 

 

उत्तराखण्ड, जहां पवित्र नदियों Ganga और Yamuna का उद्गम होता है, वहीं Char Dham, Adi Kailash और अनेक शक्तिपीठों के कारण सदियों से सनातन श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। राज्य सरकार इसी आध्यात्मिक विरासत को आधार बनाकर उत्तराखण्ड को वैश्विक स्तर पर धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

यह भी पढ़ें:  UKPSC परीक्षाओं पर नैनीताल पुलिस का सख्त सुरक्षा कवच, 16 केंद्रों पर 7000 से ज्यादा अभ्यर्थियों के लिए हाईटेक निगरानी...

 

 

 

सरकार ने आगामी Haridwar Kumbh Mela के आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए बजट में 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके साथ ही Haridwar से Rishikesh तक प्रस्तावित गंगा कॉरिडोर परियोजना के लिए पूंजीगत निवेश हेतु 2000 करोड़ रुपये की राशि विशेष सहायता योजना के अंतर्गत खर्च की जा रही है।

 

 

 

प्रदेश की प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा Nanda Devi Raj Jat Yatra के लिए भी 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह यात्रा राज्य की आस्था, संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है।

यह भी पढ़ें:  महिला से अभद्रता और सोशल मीडिया पर धमकी देना पड़ा भारी, हल्द्वानी पुलिस ने आरोपी को दबोचा...

 

 

 

इसके अलावा सरकार द्वारा पहले से चल रही Manaskhand Mandir Mala Project के तहत 48 मंदिरों के आसपास अवस्थापना विकास कार्य भी तेजी से किए जा रहे हैं।

 

 

 

बजट में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई अन्य योजनाओं का भी प्रावधान किया गया है। इनमें सरयू और अन्य रिवर फ्रंट परियोजनाएं, हरिपुर कालसी में यमुना घाट का विकास, तथा स्प्रिचुअल इकोनॉमी जोन की स्थापना के लिए 10 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके साथ ही संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संस्कृत पाठशालाओं के अनुदान के लिए 28 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

यह भी पढ़ें:  UKPSC परीक्षाओं पर नैनीताल पुलिस का सख्त सुरक्षा कवच, 16 केंद्रों पर 7000 से ज्यादा अभ्यर्थियों के लिए हाईटेक निगरानी...

 

 

 

प्रदेश सरकार का मानना है कि धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के विस्तार से न केवल उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के नेतृत्व में राज्य सरकार देवभूमि के आध्यात्मिक वैभव को संरक्षित करते हुए उसे विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है।

Ad Ad Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *