बिग ब्रेकिंग–धामी कैबिनेट के बड़े फैसले: नशे के खिलाफ सख्ती, कर्मचारियों और श्रमिकों को राहत…

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। कैबिनेट के इन फैसलों का असर कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, श्रमिक हितों और स्वरोजगार योजनाओं पर साफ तौर पर दिखाई देगा।

 

 

 

 

नशे के खिलाफ अभियान को मिलेगी मजबूती

राज्य में बढ़ते नशे के मामलों पर सख्ती दिखाते हुए कैबिनेट ने गृह विभाग के अंतर्गत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के लिए 22 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से ड्रग्स के खिलाफ अभियान को और तेज़ी मिलेगी तथा नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

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बोनस को लेकर बड़ा फैसला

कोविड काल में लागू किए गए राज्य के संशोधित ‘पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 2020’ को वापस लेने का निर्णय लिया गया है। अब केंद्रीय ‘पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965’ प्रभावी रहेगा। इससे कर्मचारियों को केंद्रीय कानून के तहत बोनस का लाभ मिल सकेगा और बोनस भुगतान को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

 

 

 

 

ईएसआई सेवाओं में 94 पदों को मंजूरी

स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए उत्तराखंड एम्प्लॉयी स्टेट इंश्योरेंस सर्विस स्कीम 2026 को मंजूरी दी गई। इसके तहत कुल 94 पद स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 76 मेडिकल ऑफिसर, 11 असिस्टेंट डायरेक्टर, 6 लेवल-12 के पद और 1 एडिशनल डायरेक्टर (लेवल-13) शामिल हैं। इससे ईएसआई से जुड़े कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।

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आदतन अपराधियों की परिभाषा में संशोधन

उत्तराखंड कारागार एक्ट में संशोधन करते हुए कैबिनेट ने आदतन अपराधियों की परिभाषा को पूर्व प्रावधानों के अनुसार लागू करने का निर्णय लिया है। इससे जेल प्रशासन को कानूनी प्रक्रियाओं में स्पष्टता मिलेगी।

 

 

 

 

वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को राहत

वन विभाग में कार्यरत दैनिक श्रमिकों के लिए राहत भरा फैसला लेते हुए शेष 589 श्रमिकों को भी न्यूनतम वेतनमान देने की मंजूरी दी गई है। कुल 893 श्रमिकों में से पहले ही कई को यह लाभ मिल चुका है। इस निर्णय से श्रमिकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना रहेगी जारी

स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना के साथ राज्य की मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना को भी जारी रखने का फैसला लिया गया है। केंद्र की योजना 2025-26 तक प्रभावी रहेगी और उसी अवधि तक राज्य योजना भी संचालित होती रहेगी।

 

 

 

कैबिनेट के इन फैसलों को प्रदेश के विकास, सुशासन और जनहित की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

 

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