निजी स्कूलों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन: नैनीताल में 12 और स्कूलों को नोटिस, अभिभावकों पर मनमानी वसूली बर्दाश्त नही..

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नैनीताल। उत्तराखण्ड के नैनीताल जनपद में निजी विद्यालयों की मनमानी पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने 12 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही जनपद में अब तक नोटिस पाने वाले निजी स्कूलों की संख्या बढ़कर 50 हो गई है।

 

 

प्रशासन की जांच में सामने आया कि कई निजी विद्यालयों द्वारा एनसीईआरटी पुस्तकों के बजाय महंगी निजी प्रकाशनों की किताबें अनिवार्य की जा रही थीं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था। इतना ही नहीं, कुछ विद्यालयों पर विशेष दुकानों से किताबें और शिक्षण सामग्री खरीदने के लिए अप्रत्यक्ष दबाव बनाने के आरोप भी लगे हैं।

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नोटिस जारी किए गए विद्यालयों में वेदान्तंम इंटरनेशनल स्कूल, चिल्ड्रन वैली पब्लिक स्कूल, न्यू बाल संसार स्कूल, आरुष पब्लिक स्कूल, जी किड्स पब्लिक स्कूल, काठगोदाम पब्लिक जूनियर हाईस्कूल, लिटिल स्पार्कल एकेडमी, मानस पब्लिक स्कूल, नेशनल पब्लिक स्कूल, श्री कृपा पब्लिक स्कूल, सेंट जॉर्ज स्कूल और समिट पब्लिक स्कूल शामिल हैं।

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मुख्य शिक्षा अधिकारी ने संबंधित विद्यालयों को 15 दिनों के भीतर संशोधित पुस्तक सूची जारी करने, एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता देने और किसी विशेष विक्रेता की अनिवार्यता समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर शुल्क संरचना और पुस्तक सूची सार्वजनिक करने तथा अभिभावकों से अतिरिक्त वसूली गई राशि का समायोजन या धनवापसी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

 

 

यह कार्रवाई ‘बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009’ और ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ के तहत की जा रही है। प्रशासन ने साफ किया है कि आदेशों की अवहेलना करने वाले विद्यालयों के खिलाफ मान्यता निलंबन या निरस्तीकरण सहित कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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जिलाधिकारी के निर्देश पर विकासखंड स्तर पर संयुक्त जांच समितियां गठित कर दी गई हैं, जो 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। प्रशासन की इस सख्ती से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

 

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