मां के संस्कारों से गढ़ता है राष्ट्र का भविष्य, सामाजिक सेवा और नारी शक्ति सम्मान समारोह में गूंजा मानवीय मूल्यों का संदेश…

रायपुर। समाज निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए आयोजित भव्य सम्मान समारोह में वक्ताओं ने कहा कि “मां के संस्कार ही राष्ट्र के चरित्र की आधारशिला हैं।” कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं और समाजसेवियों को सम्मानित किया गया। मंच पर उपस्थित अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली महिलाओं को प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह भेंट किए।
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि परिवार ही व्यक्ति की पहली पाठशाला है और मां उसकी पहली गुरु। यदि घर में संस्कार, अनुशासन और सेवा भाव का वातावरण हो, तो वही आगे चलकर राष्ट्र निर्माण की नींव बनता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सामाजिक सेवा केवल दान या सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन का मूल मूल्य है।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। मंच से यह संदेश दिया गया कि आज की नारी केवल परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि नेतृत्व, प्रशासन, शिक्षा और उद्यमिता में भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही है।
वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में मां के आदर्शों और संस्कारों को अपनाएं तथा समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाएं। समारोह में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण और सामाजिक एकता के संकल्प के साथ हुआ।
यह आयोजन न केवल महिलाओं के सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि समाज में मानवीय मूल्यों, सेवा भावना और मातृशक्ति की महत्ता को भी नई ऊर्जा प्रदान कर गया।
