अवंतिका धाम में आध्यात्मिक साहित्य का सम्मान: महाशिवरात्रि पर सतपाल महाराज को भेंट की गईं विशेष पुस्तकें…
लालकुआ (उत्तराखंड)। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर स्थित माँ अवंतिका मंदिर में महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर भक्ति, साहित्य और आध्यात्मिक संवाद का अनूठा संगम देखने को मिला। वरिष्ठ पत्रकार रमाकान्त पन्त ने उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु सतपाल महाराज से भेंट कर उन्हें अपनी दो आध्यात्मिक कृतियाँ “जय माँ बगलामुखी” और “जय माँ भद्रकाली” ससम्मान भेंट कीं।
मंदिर परिसर में आयोजित इस विशेष अवसर पर वातावरण पूरी तरह भक्तिमय रहा। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बीच यह भेंट कार्यक्रम आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण रहा।
रमाकान्त पन्त ने सतपाल महाराज को अवंतिका धाम की पौराणिक पृष्ठभूमि, ऐतिहासिक महत्व तथा क्षेत्रीय आस्था में इसके विशिष्ट स्थान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि माँ अवंतिका का यह धाम न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है, बल्कि इसकी प्राचीन आध्यात्मिक परंपराएँ इसे व्यापक धार्मिक परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करती हैं।
पुस्तकें स्वीकार करते हुए सतपाल महाराज ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि देवभूमि के शक्तिपीठों, प्राचीन मंदिरों और सनातन परंपराओं का लेखन एवं दस्तावेजीकरण समय की आवश्यकता है। उन्होंने मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा को संरक्षित रखने के प्रयासों की सराहना करते हुए ऐसे साहित्यिक कार्यों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
इस अवसर पर “जय माँ अवंतिका” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से मंदिर परिसर गूंज उठा। कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक डॉ. मोहन बिष्ट, नगर पंचायत अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह लोटनी, सांसद प्रतिनिधि लक्ष्मण खाती, विधायक प्रतिनिधि गोविंद सिंह राणा, मंदिर कमेटी के महामंत्री भुवन पांडे सहित अनेक गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर अवंतिका धाम में भक्ति, साहित्य और सांस्कृतिक चेतना का जो समन्वय देखने को मिला, उसने इस आयोजन को विशेष और स्मरणीय बना दिया।
