भीमताल में मानव तस्करी पर न्यायिक मंथन, उजाला अकादमी में दो दिवसीय कोलोक्वियम शुरू…

भीमताल। मानव तस्करी जैसे गंभीर और जघन्य अपराध से प्रभावी ढंग से निपटने तथा इससे जुड़े मामलों में न्यायिक कार्रवाई को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड ज्यूडिशियल एंड लीगल एकेडमी (उजाला), भवाली में दो दिवसीय “ज्यूडिशियल कोलोक्वियम ऑन ह्यूमन ट्रैफिकिंग” का शनिवार को विधिवत शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम 15 मार्च तक चलेगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मानव तस्करी एक गंभीर सामाजिक अपराध है, जिससे निपटने के लिए न्यायपालिका, पुलिस, प्रशासन और सामाजिक संगठनों के बीच मजबूत समन्वय बेहद जरूरी है। इस कोलोक्वियम का उद्देश्य मानव तस्करी से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बढ़ाने, बेहतर समन्वय स्थापित करने और प्रभावी कानूनी कार्रवाई को बढ़ावा देना है।
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के पुनर्वास, जांच प्रक्रिया और न्यायिक कार्रवाई से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही प्रतिभागियों को कानून, जांच और पीड़ित सहायता से संबंधित व्यावहारिक जानकारी भी प्रदान की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम न्यायिक प्रणाली, पुलिस विभाग और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देते हैं, जिससे मानव तस्करी जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
कार्यक्रम में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी, उजाला के प्रभारी न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैथानी, न्यायमूर्ति आलोक मेहरा, न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर उजाला अकादमी के निदेशक प्रदीप पंत, उत्तराखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता, जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल, राज्य के विभिन्न जिलों के जिला जज, उजाला के अपर निदेशक शादाब बानो और तरुण, संयुक्त निदेशक मो. यूसुफ तथा सहायक निदेशक कार्तिकेय जोशी के साथ पुलिस, अभियोजन विभाग, विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
दो दिवसीय इस कोलोक्वियम में न्यायिक अधिकारी, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी, अभियोजन अधिकारी और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 150 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो मानव तस्करी के खिलाफ प्रभावी रणनीति तैयार करने और न्यायिक प्रक्रिया को और सुदृढ़ बनाने पर विचार-विमर्श करेंगे।
