भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ की पत्नी की फर्म पर शासन की बड़ी कार्रवाई, खनिज भंडारण लाइसेंस तत्काल निरस्त…
देहरादून: उत्तराखंड शासन ने रायपुर से भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ की पत्नी सुबोधनी शर्मा की साझेदारी वाली फर्म मैसर्स अनन्या एसोसिएट्स के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए देहरादून के ग्राम थेवा में स्वीकृत रिटेल खनिज भंडारण अनुज्ञा (लाइसेंस) को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि फर्म रिटेल भंडारण के लिए निर्धारित दूरी संबंधी मानकों का पालन करने में विफल रही, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया।
उप सचिव हनुमान प्रसाद तिवारी द्वारा 29 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार, भूत्व एवं खनिकर्म विभाग के निदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि ग्राम थेवा, तहसील एवं जनपद देहरादून के खाता संख्या 43, खसरा संख्या 343 की कुल 0.8500 हेक्टेयर भूमि में से 0.8115 हेक्टेयर क्षेत्र पर मैसर्स अनन्या एसोसिएट्स के पक्ष में स्वीकृत रिटेल भंडारण अनुज्ञा को तत्काल प्रभाव से निरस्त माना जाए।
शासन के मुताबिक, 15 जुलाई 2026 की संयुक्त निरीक्षण आख्या तथा 28 जुलाई 2026 को प्राप्त पत्र के परीक्षण के बाद यह निर्णय लिया गया। जांच में पाया गया कि उत्तराखंड खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण का निस्तारण) नियमावली, 2021 के नियम-12 के उपनियम 2 (ii) के तहत रिटेल भंडारण के लिए निर्धारित दूरी संबंधी मानकों का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर 4 फरवरी और 12 फरवरी 2026 को जारी पूर्व आदेशों के क्रम में अब अनुज्ञा को निरस्त कर दिया गया है।
फर्म के साझेदारों में अभिजीत सिंह नेगी, किशन सिंह नेगी, सुबोधनी शर्मा और सुमित सिंह शामिल हैं। सुबोधनी शर्मा, रायपुर से भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ की पत्नी हैं। ऐसे में इस कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चाओं को तेज कर दिया है।
शासन ने मामले को केवल लाइसेंस निरस्तीकरण तक सीमित नहीं रखा है। आदेश में भंडारण अनुज्ञा से जुड़े प्रकरण में अपूर्ण अथवा त्रुटिपूर्ण सूचना एवं निरीक्षण आख्या देने वाले संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं। शासन ने दोषी कार्मिकों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई कर उसकी विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।
इस आदेश की प्रतिलिपि जिलाधिकारी देहरादून, जिला खान अधिकारी देहरादून तथा मैसर्स अनन्या एसोसिएट्स के सभी साझेदारों को भी भेज दी गई है। शासन की इस कार्रवाई को खनन नियमों के अनुपालन को लेकर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
