अरुणाचल में सरकारी ठेकों का बड़ा खुलासा: सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे से CM परिवार को मिले 146 कॉन्ट्रैक्ट उजागर…

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अरुणाचल–सुप्रीम कोर्ट में दायर एक विस्तृत हलफनामे ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में बीते एक दशक के दौरान सरकारी ठेकों के बंटवारे पर बड़ा खुलासा किया है। हलफनामे के मुताबिक, 2012 से 2023 के बीच कुल 146 सरकारी ठेके, जिनकी कीमत लगभग 383.74 करोड़ रुपये है, मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी चार कंपनियों को मिले। यह खुलासा तब हुआ, जब अदालत ने सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण की मांग पर राज्य सरकार से सभी रिकॉर्ड जमा करने को कहा।

 

 

 

हलफनामे के अनुसार, जिन कंपनियों को ये कॉन्ट्रैक्ट मिले, उनमें दो CM पेमा खांडू की पत्नी सेरिंग डोल्मा की, एक उनके भाई ताशी खांडू की और एक भाभी नीमा ड्रेमा की है। तवांग जिले में ही इन कंपनियों को 42 ठेके 209.6 करोड़, 13 ठेके 29.1 करोड़ और 91 ठेके 145.04 करोड़ रुपये के मिले।

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सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 59 ठेके बिना टेंडर सीधे वर्क ऑर्डर के ज़रिए जारी किए गए, जिनमें से कम से कम 11 की राशि 50 लाख रुपये की सीमा से अधिक थी—यह सीमा 2020 में तय की गई थी।

 

 

 

इन ठेकों में सड़क, पुल, नालियां, बिजली लाइनें, भवन, पर्यटन ढांचे, सामुदायिक भवन और कॉलेज निर्माण जैसे काम शामिल थे।

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सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती और राज्य सरकार का पक्ष

 

 

 

यह हलफनामा उस PIL का हिस्सा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सरकारी कॉन्ट्रैक्ट जारी करने में मुख्यमंत्री के परिवार को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। वकील प्रशांत भूषण ने अदालत में कहा कि पहले दिए गए दस्तावेज अपूर्ण थे, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2015–2025 तक के सभी ठेकों का पूरा रिकॉर्ड आठ हफ्ते में मांगा।

 

 

 

राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि 95% ठेके खुले टेंडर के माध्यम से दिए गए और स्थानीय परिस्थितियों के चलते कई जगह वर्क ऑर्डर प्रथा सामान्य है। सरकार ने दावा किया कि इसमें किसी तरह की पक्षपातपूर्ण मंशा नहीं है।

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हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों की बेंच—जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता—ने टिप्पणी की कि मुख्यमंत्री के परिवार को इतने अधिक ठेके मिलना ‘एक उल्लेखनीय संयोग’ है।

 

 

अगली सुनवाई

 

 

 

इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 3 फ़रवरी 2026 को निर्धारित की गई है।

 

 

 

 

 

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