बिग ब्रेकिंग–पूर्व सैनिकों के लिए बड़ी सौगात की तैयारी: उत्तराखंड में नई शस्त्र लाइसेंस नीति पर मंथन, कानूनी सहायता और अग्निवीरों के भविष्य पर भी फोकस…

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार पूर्व सैनिकों और सेवानिवृत्त अर्धसैनिक बलों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार कर रही है। इनमें पूर्व सैनिकों के लिए नई शस्त्र लाइसेंस नीति, जमीनी विवादों में निःशुल्क कानूनी सहायता तथा अग्निवीरों के रिटायरमेंट के बाद रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने जैसे विषय प्रमुख हैं।
सूत्रों के अनुसार गृह विभाग स्तर पर पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श चल रहा है। लंबे समय तक देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले सैनिकों की यह पुरानी मांग रही है कि सेवा निवृत्ति के बाद उन्हें आत्मरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस प्रदान किए जाएं। सरकार इस मांग को संवेदनशीलता के साथ देखते हुए सकारात्मक निर्णय की दिशा में आगे बढ़ रही है।
इसके अलावा पूर्व सैनिकों के बढ़ते जमीनी विवादों को देखते हुए उन्हें निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की योजना पर भी मंथन जारी है। सरकार का मानना है कि सेवा निवृत्ति के बाद कई सैनिक संपत्ति और भूमि संबंधी विवादों का सामना करते हैं, जिनके समाधान के लिए संस्थागत सहायता आवश्यक है।
अग्निवीर योजना के तहत सेना से सेवानिवृत्त होकर आने वाले युवाओं के लिए भी सरकार व्यापक रणनीति तैयार कर रही है। राज्य सरकार पहले ही पुलिस, जेल प्रहरी और वन सुरक्षा बलों में अग्निवीरों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की घोषणा कर चुकी है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे दिसंबर से पहले भर्ती प्रक्रियाएं शुरू करें।
सरकार का मानना है कि सेना से प्रशिक्षित और अनुशासित युवाओं के विभिन्न सुरक्षा सेवाओं में आने से प्रशिक्षण पर होने वाला खर्च भी कम होगा और संस्थाओं को दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध होगा। साथ ही निजी क्षेत्र को भी राष्ट्रहित में अग्निवीरों को रोजगार देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
सूत्र बताते हैं कि पूर्व सैनिकों की तर्ज पर पूर्व अर्धसैनिक बलों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर भी अंतिम चरण का विचार-विमर्श चल रहा है। सरकार सैनिकों और उनके परिवारों को राष्ट्र निर्माण से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल करने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है, जिससे उनके अनुभव और कौशल का समाज के विकास में उपयोग हो सके।
**उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल** ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ पूर्व सैनिक कल्याण से जुड़े विषयों पर कई दौर की चर्चा हो चुकी है। शासन स्तर पर भी विभिन्न मुद्दों पर संवाद हुआ है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही महत्वपूर्ण निर्णय लेगी।
उन्होंने कहा कि समान नागरिक पेंशन योजना सहित केंद्र सरकार द्वारा पूर्व सैनिकों के हित में उठाए गए कई कदमों से लाखों सैनिक परिवारों को लाभ मिला है।
वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “मैं स्वयं एक सैनिक पुत्र हूं। देवभूमि उत्तराखंड वीरों की भूमि है और हमारे सैनिकों ने सदैव राष्ट्र सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार पूर्व सैनिकों और पूर्व अर्धसैनिक कर्मियों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उनके बेहतर भविष्य के लिए कई नए प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है। साथ ही राज्य में भव्य सैन्यधाम की स्थापना का कार्य भी अंतिम चरण में है। पूर्व सैनिकों का हर घर हमारे परिवार का हिस्सा है।
पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के कल्याण को केंद्र में रखकर तैयार की जा रही ये पहलें राज्य में सैनिक सम्मान और सामाजिक सुरक्षा के नए अध्याय की शुरुआत कर सकती हैं।
