बिग ब्रेकिंग–नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का सीएम धामी को पत्र, वन भूमि पर बसे लोगों के हित में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग…

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देहरादून। ऋषिकेश के पशुलोक और उससे लगे इलाकों की 2866 एकड़ भूमि से जुड़े मामले में उच्चतम न्यायालय के हालिया निर्देशों के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर वन भूमि पर पीढ़ियों से रह रहे लोगों के अधिकारों और हितों पर गंभीर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया है।

 

आर्य ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि 22 दिसंबर 2025 को उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में कड़े निर्देश देते हुए मुख्य सचिव और मुख्य वन संरक्षक को वन भूमि की जांच के लिए एक समिति गठित करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला उच्च न्यायालय के निर्देशों से उत्पन्न हुआ है, लेकिन न्यायालय में राज्य के निवासियों को वनाधिकार अधिनियम-2006 के तहत मिलने वाले अधिकारों, वन भूमि के पट्टों और वर्षों से वहां रह रहे लोगों की मजबूरियों पर विस्तृत चर्चा संभव नहीं हो पाती।

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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वन भूमि पर रहने वाले परिवारों के अधिकारों, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति और उनकी विवशताओं पर व्यापक विमर्श केवल राज्य की विधानसभा में ही किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के लगभग हर विधानसभा क्षेत्र में इस तरह के मामले मौजूद हैं और राज्य के लोगों को उजड़ने से बचाना सरकार का प्रमुख दायित्व है।

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आर्य ने उदाहरण देते हुए कहा कि गौलापार क्षेत्र का बागजाला गांव पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से वन भूमि पर बसा है। वहीं हल्द्वानी के दमुवाढुंगा क्षेत्र में हजारों लोग पीढ़ियों से वन भूमि पर निवास कर रहे हैं। नैनीताल जिले के भाबर क्षेत्र का बिंदुखत्ता भी 200 वर्षों से अधिक समय से वन भूमि पर आबाद है।

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उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि इन सभी पहलुओं पर गंभीर और संवेदनशील चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए, ताकि वन भूमि पर बसे लोगों के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस नीति और समाधान निकाला जा सके।

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