बिग ब्रेकिंग–ऐपन कला से उद्यमिता तक: पिथौरागढ़ की मानसी कापड़ी ने रचा सफलता का नया इतिहास…
पिथौरागढ़। कहते हैं कि जब हौसले बुलंद हों और कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो, तो हर मंज़िल आसान हो जाती है। इस कहावत को चरितार्थ किया है पिथौरागढ़ स्थित लक्ष्मण सिंह महार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की बीबीए छात्रा मानसी कापड़ी ने, जिन्होंने अपनी पारंपरिक कला को न केवल पहचान दिलाई, बल्कि उसे सफल उद्यम का रूप देकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी कायम की है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड सरकार एवं भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII), अहमदाबाद के सहयोग से संचालित देवभूमि उद्यमिता योजना (DUY) राज्य के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में नवाचार एवं उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा दे रही है।
मानसी को बचपन से ही उत्तराखण्ड की पारंपरिक ऐपन कला में विशेष रुचि थी। वह आकर्षक ऐपन डिज़ाइन तैयार करती थीं, लेकिन यह केवल उनका शौक था। वर्ष 2024 में देवभूमि उद्यमिता योजना के द्विदिवसीय बूटकैंप में भाग लेने के बाद उनकी सोच बदली और उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि कला और हुनर को व्यवसाय में कैसे बदला जा सकता है।
बूटकैंप के दौरान मानसी ने अपने ऐपन कार्य को एक व्यवसायिक विचार के रूप में प्रस्तुत किया। बिज़नेस मॉडल कैनवास के माध्यम से तैयार की गई उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति ने निर्णायकों का ध्यान आकर्षित किया और उनका चयन 12 दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) के लिए हुआ।
प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने ब्रांडिंग, पैकेजिंग, लेबलिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग, ऑनलाइन बिक्री, उद्यम पंजीकरण और व्यवसाय प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों की गहन जानकारी प्राप्त की। अपनी मेंटर डॉ. रुचिता पंघुरिया के मार्गदर्शन में उन्होंने अपना उद्यम “Homies Vibes” शुरू किया।
मानसी की मेहनत को बड़ी सफलता तब मिली जब फरवरी 2025 में आयोजित देवभूमि उद्यमिता स्टार्टअप मेगा इवेंट में उनके स्टार्टअप को ₹75,000 का सीड फंड प्रदान किया गया। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने उत्पादों के विकास, व्यवसाय विस्तार और विपणन गतिविधियों में किया।
आज “Homies Vibes” उत्तराखण्ड की पारंपरिक ऐपन कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने का सफल माध्यम बन चुका है। वर्तमान में मानसी प्रतिवर्ष लगभग ₹80,000 मूल्य के ऐपन उत्पादों की बिक्री कर रही हैं और लगातार अपने ग्राहक आधार का विस्तार कर रही हैं।
मानसी कापड़ी की सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प के बल पर युवा अपनी प्रतिभा को उद्यमिता में बदलकर न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं।
