लालकुआं–नौकरी नहीं, जनसेवा चुनी: लालकुआं में पीयूष जोशी का ‘मिशन 2027’ बना सियासी चर्चा का केंद्र…

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लालकुआं/हल्द्वानी। उत्तराखंड की राजनीति में जहां अक्सर सत्ता और संसाधनों की चाहत लोगों को आकर्षित करती है, वहीं लालकुआं विधानसभा क्षेत्र से एक युवा चेहरा इस परंपरा को चुनौती देता नजर आ रहा है। हल्दूचौड़ निवासी 27 वर्षीय पीयूष जोशी ने सिविल सेवा और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे सुरक्षित व प्रतिष्ठित करियर विकल्पों को ठुकराकर जनसेवा का रास्ता चुना है। अब उनका यही फैसला क्षेत्र में ‘मिशन 2027’ के रूप में नई राजनीतिक हलचल पैदा कर रहा है।

 

दिल्ली में रहकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोग (PCS) परीक्षाओं की तैयारी करने वाले पीयूष ने मेंस और इंटरव्यू तक का सफर तय किया। साथ ही उन्होंने यूजीसी नेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की, जिससे उनके पास सरकारी महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सुनहरा अवसर था। लेकिन उन्होंने आरामदायक जीवन के बजाय संघर्षपूर्ण जनसेवा को प्राथमिकता दी।

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घर लौटने के बाद उन्होंने देखा कि प्रदेश का युवा बेरोजगारी और भर्ती घोटालों से जूझ रहा है। इसके बाद उन्होंने पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए उन्होंने कई मामलों को उजागर किया और युवाओं को संगठित कर व्यवस्था से जवाब मांगा।

 

कोरोना महामारी के दौरान उनका काम विशेष रूप से चर्चा में रहा। उन्होंने 600 से अधिक परिवारों तक ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाए, 20 हजार से ज्यादा जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराया और गंभीर मरीजों के लिए अस्पतालों में बेड और प्लाज्मा की व्यवस्था कराई। इसके अलावा क्षेत्र में सड़कों की बदहाली और आवारा पशुओं से हो रही घटनाओं को लेकर उन्होंने राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कर प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर किया।

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आज लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में पीयूष जोशी का नाम तेजी से उभर रहा है। गांव-गांव और चौपालों में ‘मिशन 2027’ को लेकर चर्चा तेज है। खासकर युवा वर्ग उन्हें एक ऐसे विकल्प के रूप में देख रहा है, जिसने निजी करियर से ऊपर उठकर समाज और भविष्य की लड़ाई को चुना।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पीयूष जोशी आगामी विधानसभा चुनाव में उतरते हैं, तो पारंपरिक राजनीति जो धनबल और परिवारवाद पर आधारित रही है उसे कड़ी चुनौती मिल सकती है। जनसंपर्क, जमीनी सक्रियता और युवाओं के समर्थन के दम पर वे लालकुआं के सियासी समीकरणों को बदलने की क्षमता रखते हैं।

 

स्पष्ट है कि लालकुआं में इस बार चुनावी मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि सोच और प्राथमिकताओं के बीच भी हो सकता है जहां एक ओर पारंपरिक राजनीति होगी, वहीं दूसरी ओर जनसेवा और बदलाव का दावा।

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