मोदी के विजन से बदली देवभूमि की तस्वीर: केदारनाथ से आदि कैलाश तक उत्तराखण्ड बना वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन का केंद्र…

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देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान उत्तराखण्ड के धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों के विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। केदारनाथ, बदरीनाथ और आदि कैलाश जैसे पवित्र तीर्थस्थलों में संचालित पुनर्विकास एवं आधारभूत ढांचा परियोजनाओं ने देवभूमि को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है। आज उत्तराखण्ड केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि दुनिया के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्यों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम मिला है। केदारनाथ-बदरीनाथ धाम पुनर्विकास परियोजना, मानसखंड मंदिर माला मिशन, रोपवे परियोजनाएं और चारधाम सड़क परियोजना जैसी पहलें उत्तराखण्ड को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण और पुनर्विकास का कार्य केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं कई बार केदारनाथ पहुंचकर परियोजनाओं की समीक्षा कर चुके हैं। परिणामस्वरूप केदारपुरी में आधुनिक सुविधाओं का विकास हुआ है और धाम की दिव्यता एवं भव्यता को नए स्वरूप में स्थापित किया गया है।

 

इसी प्रकार बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत व्यापक विकास कार्य जारी हैं। लगभग 255 करोड़ रुपये की लागत से चल रही विभिन्न परियोजनाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ धाम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का संरक्षण करना है। बदरीनाथ को एक स्मार्ट आध्यात्मिक पर्वतीय नगर के रूप में विकसित किया जा रहा है।

 

तीर्थयात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए महत्वाकांक्षी रोपवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 12.9 किलोमीटर लंबे रोपवे का निर्माण लगभग 4,081 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा, जबकि गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 12.4 किलोमीटर लंबे रोपवे पर करीब 2,730 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन परियोजनाओं से बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए यात्रा अधिक सुगम और सुरक्षित बनेगी।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आदि कैलाश दौरा भी उत्तराखण्ड के सीमांत क्षेत्रों के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। पिथौरागढ़ स्थित आदि कैलाश और पार्वती कुंड की तस्वीरों ने देश-दुनिया का ध्यान आकर्षित किया, जिससे धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिली और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं विकास की संभावनाएं बढ़ीं।

 

कुमाऊं क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए शुरू किए गए मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत प्राचीन मंदिरों को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं, बेहतर संपर्क मार्गों और आधारभूत ढांचे से जोड़ा जा रहा है। वहीं चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना ने धार्मिक यात्राओं को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बना दिया है।

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इसके अलावा हरिपुर कालसी क्षेत्र में यमुना तीर्थ स्थल के भव्य विकास की दिशा में भी कार्य जारी हैं। यह परियोजना यमुना नदी से जुड़ी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन गतिविधियों को नया आयाम देगी।

 

उत्तराखण्ड में धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में हो रहे इन व्यापक विकास कार्यों ने राज्य को विश्व के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल करने की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में देवभूमि वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगी।

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