गुलाब डे–वेलेंटाइन डे वीक पर पढ़िए पूर्व आईपीएस ध्रुव गुप्त द्वारा लिखित यह शानदार लेख…

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ऋतु बसंत की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है। यह कोमल भावनाओं की उष्मा और रगों में दौड़ते रूमान को महसूस करने का मौसम है। दुनिया की कई संस्कृतियां इस मौसम में अपने युवाओं को प्रेम की अभिव्यक्ति के अवसर देती रही हैं।

खासकर कुछ आदिवासी संस्कृतियों में इस मौसम में युवाओं के बीच प्रणय-निवेदन को समाज की सहज स्वीकार्यता हासिल है। रूढ़िवादियों के दबाव में हमारे अपने देश से वसंतोत्सव और मदनोत्सव की हजारों साल लंबी परंपरा का अब लोप हो चुका है। ऐसे में पश्चिम से आयातित वेलेंटाइन सप्ताह का क्रेज हमारे युवाओं में तेजी से बढ़ी है।

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प्रेम की अभिव्यक्ति का यह अवसर विदेशी ही सही, नफ़रतों से सहमे इस दौर में ताज़ा हवा के झोंके की तरह है। आज वैलेंटाइन सप्ताह का पहला दिन ‘रोज डे’ है। यह दिन अपने प्रिय लोगों को प्रेम का प्रतीक लाल गुलाब पेश करने का अवसर है। गुलाब के बहाने अपने प्रिय लोगों को बताने का मौका कि हमारे रिश्तों में अब भी कुछ श्रेष्ठ, कुछ मुलायम, कुछ प्रेमिल बचा हुआ है।

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इन दिनों गुलाब पर अगर बाज़ार का कब्ज़ा है तो अपने चाहने वालों को गुलाब का एक-एक पौधा ही क्यों न भेंट कर दें। ये पौधे साल दर साल खिलेंगे और उन्हें हमारी याद दिलाते रहेंगे। उससे भी बेहतर तो यह होगा कि गुलाब का सहारा लेने के बजाय हम ख़ुद ही गुलाब बनकर तमाम रिश्तों को प्यार की ख़ुशबू से सराबोर कर दें-सबसे एक फूल मांगना कैसा / आज ख़ुद को गुलाब करते हैं।

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