बाजपुर में फर्जी प्रमाणपत्रों के खेल का पर्दाफाश, 5 गिरफ्तार, NEET–UG 2026 से जुड़े दस्तावेजों की जांच में खुली परतें, चार अन्य भी नामजद; आरक्षित श्रेणी के प्रमाणपत्रों की भी होगी पड़ताल…
बाजपुर। फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर कथित तौर पर अनुचित लाभ लेने के मामले में बाजपुर पुलिस और राजस्व विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के बाद अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी जांच के जरिए मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
मामले की शुरुआत 24 सितंबर को हुई, जब तहसीलदार बाजपुर प्रताप सिंह चौहान के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े पांच लोगों को पकड़कर कोतवाली बाजपुर पहुंचाया। राजस्व विभाग की ओर से दी गई तहरीर और उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर पांचों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक मामला NEET-UG 2026 से जुड़े प्रमाणपत्रों की जांच से सामने आया है। जांच में कथित तौर पर फर्जी या कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात सामने आने के बाद संबंधित प्रमाणपत्रों की सत्यता की पड़ताल शुरू की गई है।
अब जांच का दायरा आरक्षित श्रेणियों से जुड़े प्रमाणपत्रों तक भी बढ़ाया जा रहा है। संबंधित दस्तावेजों के जारी होने की प्रक्रिया, उनकी वास्तविकता और उनका इस्तेमाल करने वाले लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मौ. आलम पुत्र सराफत हुसैन निवासी शिवनगर, सुल्तानपुर पट्टी, श्याम बिहारी भोजवाल पुत्र गेंदानलाल निवासी बरखेड़ा, पीलीभीत, शिवम माथुर पुत्र बालजीत निवासी इज्जतनगर, बरेली, अर्चना पत्नी आशीष भारद्वाज निवासी मुंडिया कला, बाजपुर और रोहित पुत्र राजेन्द्र सिंह निवासी हरलालपुर, बाजपुर के रूप में हुई है।
इसके अलावा पुलिस ने चित्रा, अनुराग भोजवाल, दीक्षा और रिया को भी मुकदमे में नामजद किया है। पुलिस अब इन सभी की भूमिका और मामले से उनके संबंधों की जांच कर रही है।
पुलिस कार्रवाई के दौरान छह मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। बरामद उपकरणों में Poco, Samsung S24 Ultra, Vivo, Realme, Samsung और Motorola के मोबाइल शामिल हैं।
जांच टीम इन मोबाइल फोन में मौजूद कॉल डिटेल, संदेश, दस्तावेज और अन्य डिजिटल सामग्री की पड़ताल कर सकती है। माना जा रहा है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से मामले की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिल सकती है।
कोतवाली बाजपुर में मुकदमा संख्या 354/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 338, 340 एवं 3(5) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी की प्रक्रिया के दौरान सुप्रीम कोर्ट के डीके बसु दिशा-निर्देशों का पालन किया गया।
पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच का फोकस अब इस बात पर है कि कथित फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, उन्हें तैयार कराने के पीछे क्या उद्देश्य था, इनका इस्तेमाल किस लाभ के लिए किया जाना था और इस पूरे मामले में नामजद अन्य लोगों की वास्तविक भूमिका क्या है।
जांच टीम दस्तावेजों के स्रोत से लेकर उनके इस्तेमाल तक की पूरी कड़ी खंगाल रही है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर मामले में और नाम सामने आने या अन्य कार्रवाई होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
पूरी कार्रवाई में तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान, राजस्व निरीक्षक सतपाल, राजस्व निरीक्षक कृपाल सिंह, राजस्व उपनिरीक्षक जानकी प्रसाद द्विवेदी, मौ. अजमल, महिला राजस्व उपनिरीक्षक हेमा यादव तथा पुलिस टीम से वरिष्ठ उपनिरीक्षक जसविन्दर सिंह, उपनिरीक्षक कैलाश नगरकोटी, हेड कांस्टेबल राकेश भट्ट और महिला कांस्टेबल अदिति शामिल रहीं।