अत्याचार निवारण अधिनियम के लंबित मामलों पर सरकार सख्त, समयबद्ध निस्तारण के निर्देश…

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देहरादून। सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिकारियों को अधिनियम के तहत लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

 

बैठक में स्पष्ट किया गया कि अत्याचार से प्रभावित पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। लंबे समय से लंबित और गंभीर प्रकृति के मामलों में पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।

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अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि प्रभावित परिवारों की सहायता केवल आर्थिक राहत तक सीमित न रहे। आवश्यकता के अनुसार पीड़ित परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास समेत अन्य पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया जाए।

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बैठक में विशेष रूप से निर्देश दिए गए कि किसी घटना के कारण प्रभावित परिवार के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। संबंधित विभाग बच्चों की शिक्षा को जारी रखने के लिए आवश्यक सहायता और व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। अधिकारियों से संवेदनशीलता के साथ मामलों की निगरानी करते हुए पीड़ित परिवारों को शासन की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिलाने पर विशेष जोर दिया गया।