फर्जी आधार और मृत्यु प्रमाण पत्र से जमीन का विरासतन नामांतरण, कमिश्नर दीपक रावत ने दिए लैंड फ्रॉड की जांच के आदेश…

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मल्ला निगलाट में सामने आया कथित भूमि फर्जीवाड़ा, राजस्व कर्मियों की भूमिका की भी होगी जांच; दोषी पाए जाने पर FIR और अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश।

 

हल्द्वानी/नैनीताल। कुमाऊं मंडल में भूमि संबंधी मामलों की सुनवाई के दौरान ग्राम सभा मल्ला निगलाट, पट्टी पाडली, तहसील श्री कैंचीधाम से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि फर्जी आधार कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर एक व्यक्ति को मृतक का वारिस दर्शाते हुए भूमि का विरासतन नामांतरण करा दिया गया और इसके कुछ ही समय बाद भूमि की बिक्री भी कर दी गई।

 

मामले को गंभीरता से लेते हुए कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने जिलाधिकारी नैनीताल को पूरे प्रकरण की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त ने भूमि फर्जीवाड़े, दस्तावेजों की सत्यता और संबंधित राजस्व कार्मिकों की भूमिका की जांच के साथ दोषी पाए जाने पर प्राथमिकी दर्ज कराने तथा विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

 

ग्राम मल्ला निगलाट के ग्रामीणों ने 29 सितंबर 2026 को आयुक्त कुमाऊं मंडल दीपक रावत को शिकायत देकर बताया कि ओम प्रकाश नाम के व्यक्ति ने स्वयं को केशवदत्त पुत्र चंद्रमणि का वारिस बताते हुए खतौनी में अपना नाम दर्ज करा लिया।

 

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, ग्राम निवासी मनिक मेहरा ऑनलाइन रजिस्ट्री की नियमित निगरानी करते थे। इसी दौरान कथित तौर पर संदिग्ध तरीके से भूमि के नामांतरण और उसके बाद हुई रजिस्ट्री की जानकारी सामने आई।

 

ग्रामीणों का कहना है कि मल्ला निगलाट में ओम प्रकाश पुत्र केशवदत्त नाम का कोई व्यक्ति न तो निवास करता है और न ही गांव का निवासी है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि खतौनी में दर्ज केशवदत्त पुत्र चंद्रमणि नाम का व्यक्ति भी गांव में मौजूद नहीं है।

 

30 सितंबर 2026 को आयुक्त कार्यालय में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान शिकायतकर्ताओं, तहसीलदार श्री कैंचीधाम, राजस्व कर्मियों और अन्य संबंधित पक्षों को बुलाया गया।

 

शिकायतकर्ताओं ने सुनवाई के दौरान बताया कि केशवदत्त की मृत्यु वर्ष 1983 में हो चुकी थी। इसके बावजूद वर्ष 2026 में कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर भूमि में वारिसान दर्ज कराया गया।

 

मामले में लगाए गए दस्तावेजों को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रथम दृष्टया शिकायतकर्ताओं के अनुसार रजिस्ट्री में प्रयुक्त आधार कार्ड उत्तर प्रदेश के किसी व्यक्ति का बताया जा रहा है, जिसकी उम्र करीब 40 से 50 वर्ष के बीच होने का दावा किया गया है, जबकि संबंधित रजिस्ट्री में उसी व्यक्ति की उम्र 73 वर्ष दर्ज बताई गई है।

 

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस पूरे मामले में कई लोगों की भूमिका संदिग्ध है। ग्रामीणों ने नरेश पांडे, संध्या बोरा, कर्नल विवेक भट्ट निवासी रामगढ़, संजय बोहरा, ग्राम डोब की प्रधान पुष्पा देवी तथा हिमांशु निवासी गोलापार समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है।

 

शिकायत के अनुसार तहसील श्री कैंचीधाम के कानूनगो द्वारा 21 अगस्त 2026 को विरासतन नामांतरण पारित किया गया। आरोप है कि नामांतरण के ठीक एक महीने बाद संबंधित भूमि संध्या बोरा द्वारा खरीद ली गई। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

 

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त दीपक रावत ने जिलाधिकारी नैनीताल को मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

 

निर्देशों में कथित लैंड फ्रॉड की जांच, आधार कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता की जांच तथा दस्तावेज कूटरचित पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने को कहा गया है।

 

इसके साथ ही मामले में यदि किसी राजस्व कार्मिक की भूमिका या लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

 

आयुक्त कुमाऊं मंडल ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपनी भूमि से संबंधित खतौनी, रजिस्ट्री और अन्य राजस्व अभिलेखों की समय-समय पर जांच करते रहें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध प्रविष्टि, नामांतरण या रजिस्ट्री की जानकारी सामने आने पर तत्काल संबंधित राजस्व विभाग अथवा प्रशासन को सूचना दें।

 

अब इस मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर तैयार हुए, नामांतरण की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई और भूमि बिक्री तक मामला किस तरह पहुंचा।

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