ज्ञान गंगा सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संदेश—बच्चों के सपनों को नई उड़ान देना ही सच्ची सेवा…

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में कुसुम कांता फाउंडेशन एवं मंथन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम’ में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया और मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की।

 

मुख्यमंत्री ने सम्मानित शिक्षकों और छात्रवृत्ति प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि ज्ञान गंगा सम्मान समारोह महज सम्मान और छात्रवृत्ति का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रतिभाओं को पहचान देने, शिक्षा को बढ़ावा देने और बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का सराहनीय प्रयास है। किसी बच्चे की शिक्षा में सहयोग करना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उसके सपनों को साकार करने में सहभागी बनना है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव सर्वोच्च स्थान प्राप्त रहा है। शिक्षक विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देने के साथ-साथ उन्हें दृष्टि, आत्मविश्वास और संस्कार भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक कक्षा में केवल एक विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है।

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उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उत्तराखण्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

 

मुख्यमंत्री ने स्व. कुसुम कांता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संगीत, साहित्य और शिक्षा के प्रति उनका समर्पण प्रेरणादायी रहा। उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए कुसुम कांता फाउंडेशन पिछले छह वर्षों से शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने मंथन वेलफेयर एसोसिएशन के कार्यों की भी सराहना की।

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पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपनी धर्मपत्नी स्व. कुसुम कांता को भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा, साहित्य, संगीत और समाज सेवा के प्रति उनका विशेष अनुराग था। एक शिक्षिका के रूप में उन्होंने शिक्षा और संस्कारों को सदैव प्राथमिकता दी। उनके आदर्शों और सेवा भावना को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

 

मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को सुविधाएं देने के साथ-साथ समय, अच्छे संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक मार्गदर्शन भी दें। उन्होंने कहा कि बच्चों का उज्ज्वल भविष्य केवल अच्छी शिक्षा से नहीं बनता, बल्कि इसके लिए विद्यालय और परिवार दोनों का साथ चलना जरूरी है।

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उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि असफलताओं से सीख लेकर लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए जरूरी अवसर और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।

 

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक सविता कपूर, प्रो. सुधारानी पाण्डेय, कुसुम कांता फाउंडेशन की संस्थापक विदुषी निशंक, आर्यन देव उनियाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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