18 किलोमीटर पैदल चलकर ससुराल पहुंची दुल्हन की पुकार पर मुख्यमंत्री धामी का एक्शन, अब उदांवा गांव तक पहुंचेगी सड़क…
शर्मिला की मार्मिक गुहार आई काम, मुख्यमंत्री ने ग्रामीण निर्माण विभाग को दिए सड़क निर्माण के निर्देश; वर्षों से सड़क की राह देख रहे ग्रामीणों में जगी उम्मीद..
देहरादून/चकराता। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़क सुविधा का अभाव आज भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी समस्या की तस्वीर जौनसार-बावर क्षेत्र के उदांवा गांव से सामने आई, जहां शादी के बाद दुल्हन को अपने ससुराल पहुंचने के लिए करीब 18 किलोमीटर का कठिन सफर पैदल तय करना पड़ा। अब इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संज्ञान लेते हुए सड़क निर्माण की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
मामला चकराता तहसील के बुल्हाड़ गांव की रहने वाली शर्मिला और उदांवा गांव के अनिल के विवाह से जुड़ा है। मंगलवार को विवाह की रस्में पूरी होने के बाद शर्मिला पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ बरात लेकर अपने ससुराल के लिए रवाना हुईं। लेकिन गांव तक मोटर मार्ग नहीं होने के कारण उन्हें बरातियों के साथ लगभग 18 किलोमीटर लंबा दुर्गम रास्ता पैदल तय करना पड़ा।
करीब चार घंटे तक चले इस कठिन सफर के दौरान शर्मिला ने अपनी परेशानी को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री से उदांवा गांव तक सड़क बनवाने की मांग की। उनकी यह गुहार केवल एक दुल्हन की परेशानी नहीं, बल्कि उन ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या को भी उजागर करती है, जिन्हें आज भी बुनियादी सड़क सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
मामले को समाचार पत्र दैनिक जागरण ने प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद यह मुद्दा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचा। मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लेते हुए ग्रामीण निर्माण विभाग को उदांवा गांव तक सड़क निर्माण कराने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के इस कदम से क्षेत्र के ग्रामीणों में सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद जगी है। यदि सड़क निर्माण की योजना धरातल पर उतरती है, तो गांव के लोगों को आवागमन के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में भी राहत मिल सकती है।
शर्मिला की यह गुहार अब उदांवा गांव के विकास की उम्मीद बन गई है। ग्रामीणों को आशा है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और दुर्गम रास्तों की मजबूरी से उन्हें जल्द निजात मिलेगी।

